शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

कीचड़ उछाल राजनीति, घोषणाएं गायब



यह कमाल भारतवर्ष में ही हो सकता है कि साफ स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां हकीकत के रूप में जब जनता से रूबरू होती हैं तो उक्त बातें धरी की धरी रहे जाती हैं। इनके भाषणों में स्वराज और विकास के मुद्दे किनारे रखे रहते हैं और एकदूसरे पर कीचड़ उछालते शब्द ही सामने आते रहते हैं। आप देखिए देश भर में नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मायावती, मुलायम सिंह की सभाएं हो रही हैं। इनमें सांप्रदायिकता, अभद्र भाषा और समाज के बीच दीवारें खड़ी करने वाले भाषण ही सुनाई दे रहे हैं।

इस मामले में हम कुछ हद तक मीडिया को भी जिम्मेदार ठहरा सकते हैं, क्योंकि कोई नेता अगर विकास की महंगाई की या सुराज की बात करता भी है तो भी मीडिया सिर्फ वही बातें दिखाता या पढ़ाता है, जिसमें उसे चटखारे लेने का अवसर नजर आता है। मीडिया खासतौर से इलेक्ट्रो‍निक मीडिया शायद मानता है कि जनता टीवी पर सिर्फ नकारात्मक तस्वीर ही देखना चाहती है। वह भूल जाता है कि बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार की तस्वीर दिखाकर ही उसने वर्तमान सरकार की छवि पर प्रहार किए थे और जनता ने उसका साथ दिया था। अब वही जनता देखना और सुनना चाहती है कि कौन किस तरह महंगाई और भ्रष्टाचार से निजात दिलाएगा। 

भाजपा का घोषणापत्र नदारद! : तो इसका मतलब हम क्या यह निकालें कि सौहार्द्र की बातें क्या केवल कागजों में ही रह जाएंगी। जनता भी कब तक कागजी बातों पर भरोसा करे। कागजी बातें मतलब घोषणापत्र। अब तो शायद विभिन्न दल भी यह मानने लगे हैं कि जनता के लिए घोषणा पत्रों का मतलब केवल रद्दी का पुलंदा रह गया है। इसीलिए वे अपने घोषणापत्र जारी करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाते। इसे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहा जाए कि वोटिंग के पहले चरण की तारीख नजदीक है और भारत पर राज करने का सपना देख रही भाजपा अभी तक अपना घोषणापत्र जारी नहीं कर सकी है। घोषणापत्र में देरी पर सवाल पूछने पर फिलहाल तो भाजपा नेता यह कह रहे हैं मोदी जो बोल रहे हैं, वही हमारा घोषणापत्र है।

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