मुंबई। अंधेरी पश्चिम में अंधेरी एज्युकेशन सोसायटी के अतंर्गत कार्यरत सेठ माधवदास अमरसी हाईस्कूल में कल स्कूल के ५० शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने अपने ही प्रिंसिपल एवं मैनेजमेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस विरोध प्रदर्शन में स्कूल के बच्चे और पालक भी शामिल हुए। सभी का आरोप हैं कि स्कूल के प्रिंसिपल ने टीचर को चाईल्ड एक्ट के फर्जी मामले में पंâसाकर उनके परिवारवालों को सड़क पर ला दिया हैं।
छात्रों के भविष्य के मार्गदर्शक कहलानेवाले शिक्षक कल पूरे दिन स्कूल का कामकाज बंद कर अपने हीं मैनेजमेंट के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे। दिन भर छात्रों ने भी अपने ही सरफिरी महिला प्रिसिंपल शर्लिन पॉल की आपसी रंजिश एवं घिनौनी सा़जिश का पर्दाफाश होते देखा। स्कूल के ५० शिक्षकों ने कल मीडिया के सामने यह आरोप लगाया कि शर्लिन पॉल ने पुरानी रंजिश के चलते स्कूल के एक पुराने सहायक शिक्षक योगेश यादव के खिलाफ दो स्वूâली छात्राओं से झूठा बयान लेकर बाल यौन शोषण का मामला दर्ज करवाकर जेल भेज दिया। योगेश इस समय चाईल्ड एक्ट मामले में ९० दिनों से भायखला के ऑर्थर रोड जेल में बंद हैं । इसी मामले को लेकर स्कूल के ५० शिक्षकों ने योगेश यादव के पक्ष में मानवाधिकार संगठन, शिक्षा समिती एवं पुलिस विभाग को एफिडेविट के साथ योगेश के बेगुनाही के सबूत एवं जांच का मांग पत्र सौंपा हैं। शिक्षकों का आरोप यह भी हैं कि इस मामले को नजरअंदाज कर शिक्षा समिती जोगेश्वरी के निरिक्षक प्रकाश बागुल भी अपनी नींद में बिगुल बजा कर शर्लिन पॉल को संरक्षण देने में लगे हैं। मगर मामला जैसे ही मीडिया में उछला तो तुरंत स्कूल मैनेजमेंट के सचिव सुनिल भाई मेहता ने शर्लिन पॉल को सस्पेंड करार दिया।
गौरतलब हैं कि कल प्रदर्शन के बीच मानवाधिकार संस्था ’’ अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प’’ के विरार समिती अध्यक्ष प्रविण राणे की अगुवाई में स्कूल के हॉल में हीं मैनेजमेंट ट्रस्टी एवं शिक्षकों के बीच मीटिंग बुलाई गई। जिसमे कुछ मीडिया के लोग भी उपस्थित थे। मीटिंग में योगेश के समर्थन में बढते कदमों को देखते हुए सह सचिव आनंद ठाकुर ने यादव के परिवारवालों को मासिक वेतन देने के अलावा आर्थिक मदद का प्रस्ताव रखने की बात कही। मीटिंग में योगेश यादव की पत्नी गीता और दो बच्चे भी मौजूद थे। मीटिंग के दौरान मानसिक संतुलन बिगड़ जाने के कारण गीता अचानक बेहोश हो गई, तदउपरांत मैनेजमेंट वहां से नौ-दो-ग्यारह होने में ही अपनी भलाई समझे।
सोचनेवाली बात तो यह हैं कि इतने गंभीर मामले को लेकर भी मैनेजमेंट के चेयरमैन दलाल मीटिंग में नदारद थे। शिक्षिका पूजा पांडेय के मुताबिक मामला अभी कोर्ट में हैं। कोर्ट फैसला फैसला करेगा कि योगेश सर बेकसूर हैं या नहीं। मगर हम सभी लोग यह जानते हैं उनका आचरण और पढाने की शैली को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि वे अपराध कर सकते हैं। उप प्राचार्या लिडविन पिंटो ने भा यही बात कही कि यादव का परिवार इस समय अकेला हैं। इनके जेल जाने से रोजी-रोटी बंद हो गई हैं। अत: उनके बेकसूर साबित होने तक परिवार को आर्थिक मदद देने का दायित्व मैनेजमेंट का बनता हैं। जबकि दूसरी ओर स्वूâल के कई छात्र एवं छात्राएं भी इस मुसीबत की घड़ी में योगेश की फॅमिली के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने के लिए खड़े हैं।

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