सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

बेस्ट प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ बेस्ट कर्मियों का प्रदर्शन


४ घंटे के कामकाज को बढाने के फैसले का विरोध
शैलेष जायसवाल / मुंबई
एक तरफ जहां मुंबई महानगर पालिका को शहर से प्रतिदिन की आमदनी एक करोड़ रूपए से अधिक हैं, वहीं इसी के अंतर्गत आने वाली बेस्ट बस सेवा में काम करनेवाले कर्मचारी अब अधिक समय तक काम और कम वेतन को लेकर परेशानी में हैं। मुंबई में बेस्ट कर्मचारियों के लिए उनके मौजूदा ८ घंटे के कार्य समय को बढाकर  १२ घंटो से अधिक कर दिए जाने को लेकर मुंबई के बेस्ट कर्मियों में तीव्र असंतोष व्याप्त हैं। कल दिनभर अंधेरी स्थित मरोल बस डेपो के बाहर बेस्ट कर्मियों ने इस  फैसले का विरोध कर धरना प्रदर्शन किया।
बेस्ट कर्मचारी पहले से ही कम वेतन और मूलभूत असुविधाओं की मार झेल रहे हैं। ऐसे में बेस्ट समिती द्वारा बढाए गए उनके कार्यसमय ने उनकी कमर तोड़ दी हैं। हालांकि उक्त १२ घंटे कार्यसमय का फैसला अगले माह से लागू होगा। मगर इस फैसले को अभी से कर्मचारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। मरोल डेपो में पिछले तीन दिनों से जारी इस धरना प्रदर्शन में कर्मचारियों ने मुंबईकरों को कोई परेशानी में न डालते हुए अपना काम करते हुए ४ घंटे अतिरिक्त कामकाज का बहिष्कार किया हैं। साथ हीं मौका मिलते हीं सभी कर्मचारी एक साथ धरना प्रदर्शन में शामिल हो कर बेस्ट प्रशासन के इस फैसले का विरोध जता रहे हैं।
जाहिर हैं कि बेस्ट में कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो दूर-दूर से अपनी ड्यूटी निभाने आते हैं। उन्हें आने में हीं २ घंटे से अधिक का समय लग जाता हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता हैं कि १२ घंटे की ड्यूटी निभाकर ४ घंटे सफर में बिताने के बाद कर्मचारी अपने परिवार के साथ क्या समय बिताएगा। विश्वमातरम् को जानकारी देते हुए बेस्ट कर्मचारी निलेश घोरपड़े ने बताया कि किसी भी राजनैतिक मदत न लेते हुए कर्मचारी फैसले का विरोध कर रहे हैं। जबकि महेश म्हसके के मुताबिक उक्त फैसले को रद्द नहीं किया गया तो मुंबई के सभी कर्मचारी मजबूरन उग्र आंदोलन करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं: