सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

पिता कि तरह मै भी देश का सच्चा सिपाही -सुनील पारस्कर



मुंबई [ अजय शर्मा ]
   भारतीय पुलिस सेवा में कई एक से एक पुलिस आईपीएस अधिकारी पैदा हुए। उन्हीं में एक नाम जो बहुत विख्यात हैं। जिन्हें हम सुनील पारस्कर के रूप में जानते हैं। इनके पिता जो पारस्कर साहब जिन्हें हमें बताने कि जरूरत नहीं सारा हिन्दुस्तान और संसार जानता है। क्योंकि उन्होंने कारनामा ही ऐसा किया था देश कि खातिर।
  सुनील पारस्कर को तेज तर्रार, जाँबाज, बहादुर,  कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार पुलिस अधिकारी के रूप में लोग पहचानते हैं। आज ये मुंबई के उत्तर प्रादेशिक विभाग के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त पद पर आसीन हैं। ठीक अपने पिता के तरीके कि कार्य शैली है। उनमें, आप सभी को बता दे जो लोग नहीं जानते हो कि सुनील साहब के पिता ने हिन्दुस्तान मुल्क के खातिर जोश और जुनून में भारत माता का सर उँचा करने के लिए अपना हवाई जहाज पाकिस्तान कि भूमि में उतार कर पूरे संसार भर में परचम लहरा दिया था। अपने पिताजी के नक्शे कदम पर चलते हूए सुनील साहब ने कई बड़े बड़े अपराधियों के छक्के छुड़ा दिए है। सभी लोग उनको मान सम्मान देते हैं। आई पी एस बनना वो भी देश भक्त परिवार में पैदा होकर यह भाग्य पूर्ण जन्म हर किसी को नसीब नहीं होता है। इन्हें कई बहादुरी पुरस्कार से नवाज़ा गया है। लेकिन जो राष्ट्रपति पुरस्कार है।वो हर किसी को नसीब नहीं होता है। वो पुरस्कार इनकी झोली में गया है यह सुनील साहब के लिए बहुत ही नसीब कि बात है। और गर्वान्वित बात है। उनका जज्बा देश और समाज के लिए अच्छे कामों को करने का है। उन्होंने युवा पीड़ी से अपील कि है। कि ऐसा अच्छा काम करो कि देश के साथ माता पिता का नाम भी रौशन हो। साफ सुथरी छवि वाले पारस्कर कहते हैं। कि
" कुछ नशा तिरंगे कि आन का है।
  कुछ नशा मातृभूमि कि शान का है।
 हम हिन्दुस्तानी हर जगह लहरायेंगे ये तिरंगा
 नशा ये हिन्दुस्तान कि शान का है। "
  जय हिन्द जय भारत

 अन्त में पारस्कर साहब ने कहा कि मैं पत्रकारों का  धन्यवाद कहता हूँ। और उम्मीद करता हूँ कि यह सब और देश समाज के हित में काम करें।

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