सोमवार, 23 दिसंबर 2013

अपना वजूद बचाने खुद चुनाव में उतरेंगे हिजड़े

 
शैलेष जायसवाल / मुंबई
    समलैंगिक कानून को लेकर सुप्रिम कोर्ट के पैâसले के बाद समलैंगिकों के लिए अब केवल संसद के नेताओं का ही सहारा बचा हैं। ऐसे में वे अब नेताओं मदद मांगेगे या फिर खुद राजनिती में उतरेंगे। यहां तक कि आगामी लोगसभा चुनाव में कुछ हिजड़ों ने चुनाव में उतरने के संकेत भी दे दिए हैं। हालांकि मुंबई में समलैंगिक लोगों के हित में काम करनेवाली संस्था ’द हमसफर ट्रस्ट’ ने  समलैंगिक एवं हिजड़ों का पक्ष रखनेवाले नेताओं को सपोर्ट करने की अपील भी की हैं। मगर खुद फिलहाल किसी समलैंगिक पार्टी बनाने से इनकार किया। 
    धारा ३७७ से अब समलैंगिक लोगों पर गिरती गा़ज को देखते हुए देशभर में मामला तूल पकड़ता जा रहा हैं। वहीं पहले से राजनीति में मौजूद शबनम मौसी एवं गुजरात के मेयर ने अब संसद का चुनाव लड़ने का मन बनाया हैं। जबकि मुंबई में भी कुर्ला में रहनेवाली आशा उर्पâ युसूफ मारवाड़ी नामक किन्नर ने इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी जाहीर की हैं। गौरतलब है कि सन २००३ के मुंबई मनपा चुनाव में भी वह चुनाव के लिए खड़ी थी। मीडिया में बहुचर्चित नाम लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। यह जानकारी जोगेश्वरी में रहनेवाले लक्ष्मी के करीबी पूजा नामक किन्नर ने दी। हमसफर ट्रस्ट की उपाध्यक्षा उर्मी जाधव ने कल ही मीडिया के सामने जाहिर किया कि ये सभी अगर समलैंगिकों के हित में अगर चुनाव लड़ते हैं तो वे सभी एकजुट होकर उनकी मदद करेंगे। 
    एडव्होकेसी ऑफिसर सोनल गियानी का कहना हैं कि समाज और परिवार उन्हें तिरस्कृत भावना से देखता हैं। इसलिए उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिल पाती। सरकार ने गर्भ में पलती बच्ची तथा अन्य सभी लोगों के हित में कानून बनाए। यहां तक कि जानवरों और पेड़ पौधों के लिए भी उनके हित में कई कानून हैं, तो फिर समलैंगिक समुदाय ही देश और समाज से अलग क्यों? क्या वे जानवर से भी बदतर इनसान हैं? अत: जरूरी हैं कि हिजड़ों को भी सरकारी नौकरी दी जाए। 
    फिलहाल समलैंगिकों ने बिना विरोध प्रदर्शन किए संसद के जरिए कानून बदलने की मांग की हैं। फिर भी उनके समुदाय को कहीं से सहानूभुति नहीं मिली तो राजनिती में खुद उतरने के अलावा इनके पास कोई चारा नहीं रहता।

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