शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

राष्ट्र विकास के लिए संगठित होना जरुरी - श्रीप्रकाश जायसवाल

(शैलेष जायसवाल)
    जिस प्रकार जायसवाल समाज आर्थिक स्थिति से मजबूत होता जा रहा है। उसी प्रकार समाज के पिछड़े लोगों की मदद के लिए उन्हें दान भी करना चाहिए। साथ ही आनेवाली पीढ़ी को भी शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों की ओर रूचि दिलाए तो निश्चित ही अपना समाज एक अच्छे भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसलिए समय निकालकर हम सभी का संगठित होना बहुत ही जरूरी है। ताकि राष्ट्र के विकास में भी आप कही पीछे न रहे। ऐसी भावना केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने अखिल मुंबई जायसवाल युवा मंच द्वारा सामुहिक विवाह समारोह में व्यक्त की।
    उन्होंने कहा कि अपने समाज को तरक्की पर ले जाना हो तो सबसे पहले अपने बच्चों को अच्छी तालिम दे, ताकि वे अच्छे मुकाम पर पहुंचे तो अपने आप ही अपने परिवार और समाज को उंची श्रेणी में गिना जाएगा। इसके साथ ही समाज को सुधारने साथ-साथ मुंबई के भी विकास में मुंबईवासी जायसवाल समाज का भरपूर योगदान होना चाहिए।
    कार्यक्रम में मंच पर विशेष रूप से महापौर सुनिल प्रभु, शिवसेना विधायक रविंद्र वायकर, दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल, शिवसेना उपविभाग प्रमुख विश्वनाथ सावंत, शिवसेना उत्तरभारतीय मंच के प्रमुख वेदप्रकाश पाठक तथा समाज के वरीष्ठ कार्यकर्ता बसंतलाल साव, वेदकुमार जायसवाल, संजय जायसवाल, युवा मंच के अध्यक्ष करूणेश जायसवाल तथा संरक्षक लालचंद हिरालाल गुप्ता आदि मौजूद थे।
    सुनिल प्रभु ने अपने भाषण में कहा कि मुंबई में जायसवाल समाज का काफी बड़ा कुणबा है। ऐसे में इस समाज की संगठित शक्ति को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए समाज और मुंबई के विकास के लिए जहां भी जरूरत होगी मनपा की ओर से पूरी तरह मदद करेंगे। रविंद्र वायकर ने कहा कि जायसवाल समाज के विकास के लिए शिवसेना की ओर से वे पहले से ही तत्पर रहे है और आगे भी हमेशा रहेंगे। गौरतलब है कि जोगेश्वरी विक्रोली लिंक रोड़ पर स्थित जायसवाल भवन का उदघाटन रविंद्र वायकर के ही हाथों हुआ है। प्रेम शुक्ल ने कहा कि देश के विकास के लिए पहले खुद का विकास जरूरी है। सामुहिक विवाह एक दहेज प्रथा और खर्चीली शादियों बंद करने का एक उत्तम उपाय है। इसलिए सारे समाज को सामुहिक विवाह पर जोर देना चाहिए।
    कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आत्माराम पन्नालाल जायसवाल, विजय प्रेमचंद जायसवाल, कमलाप्रसाद रामकिसन जायसवाल, दिनेश गयाप्रसाद गुप्ता, धीरज छोटेलाल गुप्ता, अरविंद मेवालाल जायसवाल, अशोक शारदाप्रसाद कलवार तथा माताप्रसाद मेवालाल गुप्ता आदि समाज के कार्यकताओं ने भरपूर परिश्रम किया।

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