बुधवार, 11 अप्रैल 2012

पुलिस की गिरफ्त से फरार हत्यारे को दबोचा

टिक्कू हत्याकांड : अनूज को किया रिहा, नहीं मिली क्लीन चीट
अँधेरी के फ्लैट में पड़ी मृत अरुण टिक्कू की लाश 
(शैलेष जायसवाल)
   अंधेरी में फ्लैट को हथियाने के मकसद से अरूण टिक्कू नामक ६७ वर्षीय बुजूर्ग की हत्या करनेवाला अपराधी विजय पालांडे पुलिस हिरासत से फरार हो जाने से पूरे पुलिस महकमें में हड़वंâप मच गया। जिससे सुरक्षा को लेकर ओशिवरा पुलिस पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। हलांकि पुलिस ने सरगर्मी से तलाश कर अपराधी को बुधवार की रात ही सातारा जिले से दबोच लिया। इस मामले में पुलिस ने अभिनेता अनुज टिक्कू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। जबकि अनुज को बेकसूर बताते हुए पुलिस ने उसे आजाद कर दिया। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम पुलिस कर्मी उक्त आरोपी को हवालात ले जाने के लिए वैन में उसे अकेला ही छोड़ चाय पीने चले गए थे। हालांकि गाड़ी पुलिस थाने के बाहर ही खड़ी थी। मगर फिर भी अपनी बात-चित में मग्न पुलिस कर्मी अपराधी के भागते हुए नहीं देख पाए।  
   गौरतलब है कि मुंबई के पॉश इलाके लोखंडवाला में मौजूद करोड़ो का फ्लैट दिल्ली के व्यवसायी अरूण टिक्कू की हत्या की वजह बन गया। हत्यारों ने उनके फ्लैट पर कब्जा करने के लिए बड़ी साजिश रची। मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच की माने तो बुजुर्ग व्यवसायी अरुण टिक्कू के फ्लैट पर कब्जा जमाने के लिए आरोपियों ने पहले उनके बेटे अनुज को अपनी दोस्ती के जाल में फंसाया था। पुलिस के मुताबिक मुंबई में अनुज की मुलाकात करण सूद नाम के एक शख्स से हुई। इसी शख्स के कहने पर अनुज ने अपना फ्लैट ब्रेगांजा नामक एक जर्मन महिला को १५ मार्च से ही दो साल की लीज पर दे दिया था। इसके लिए अनुज ने बे्रगांजा से ५ लाख रूपए डिपोजिट भी लिए। 
   हालांकि पुलिस की तहकीकात में पता चल गया कि करण का असली नाम विजय पालांडे है और जर्मन महिला असल में उसकी पत्नी है। पुलिस के मुताबिक पालांडे अंडरवल्र्ड डॉन संतोष शेट्टी के लिए काम करता था और वह दो लोगों के मर्डर में नौ साल जेल में सजा काट चुका है। पुलिस ने जानकारी दी कि विजय पिछले कई दिनों से अनुज के ही घर में अपने दो दोस्त धनंजय शिंदे और मनोज गजकोश के साथ रह रहा था। उसके बाद ५ अप्रैल को अनुज के पिता अरुण मुंबई पहुंचते ही वहां अपने घर में किराएदारों को देखकर नाराज हो गए। अनुज से उनकी कहासुनी हूई। अरुण ने किराएदारों समेत अनुज को घर से बाहर निकाल देने की बात कही। इसके बाद विजय ने फ्लैट पर कब्जे का उसका मंसूबा पूरा करने के लिए एक और साजिश रची।
   पुलिस के मुताबिक ७ अप्रैल विजय अनुज को घुमाने के बहाने गोवा ले गया और इस बीच धनंजय और मनोज ने फ्लैट में पहुंचकर अरुण को चाकूओं से गोद डाला। गौरतलब है कि फ्लैट की खिड़की पर चाकू समेत धनंजय को एक चश्मदीद ने भी देखा था और उसी चश्मदीद के बयान ने हत्या की इस गुत्थी को सुलझा दिया। पुलिस ने आशंका जाहिर कि है कि अरुण की हत्या के बाद अपराधियों ने अनुज के भी कत्ल की  साजिश रची थी। पुलिस द्वारा की गई छानबिन के मुताबिक सन २००० में भी इसी तरह से इन लोगों ने एयरइंडिया के एक पायलट  अनूप दास और उसकी पत्नी की हत्या कर उसके फ्लैट पर कब्जा कर लिया था। इस पुरे खेल में विजय की जर्मन पत्नी ने भी हर बार अहम भूमिका निभाई है। हालांकि विजय, धनंजय, और मनोज अब पुलिस की गिरफ्त में है। जबकि उसकी जर्मन पत्नी की तलाश जारी है। हांलाकि पुलिस ने इस मामले में अरुण के बेटे अनुज को पूरी तरह से क्लीन चिट नहीं दिया है। उससे अब भी पूछताछ जारी है।

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