राणे ने पार्टी नेताओं पर फोड़ा हार का ठीकरा
मुंबई. महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की करारी हार के लिए कांग्रेस नेता नारायण राणे ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। राणे ने कहा कि चुनाव प्रचार का प्रबंधन और उनका उपयोग ठीक से न किए जाने से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।
एक समाचार चैनल के साथ बातचीत में राणे ने कहा, "नगर पालिका चुनाव में पार्टी का बुरा प्रबंधन हार का बड़ा कारण बना है। चुनाव प्रचार के दौरान मेरा इस्तेमाल नहीं किया गया और न ही पार्टी ने ठीक ढंग से प्रचार किया। हम शिव सेना या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चलते नहीं हारे बल्कि अपनी गलतियों से हारे हैं।"
पिछले १६ साल सेबृहनमुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर शिवसेना-बीजेपी गठबंधन का कब्जा है। और इस बार के चुनावी नतीजों को देखकर कहा जा सकता है कि यह सिलसिला बरकरार रहेगा।
इस बार के बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने 77, भाजपा ने 30, कांग्रेस ने 51, एनसीपी ने 14, एमएनएस ने 29 और अन्य ने 26 सीटें जीती हैं। इस तरह से बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 107 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के मैजिक फीगर 114 से सात सीटें कम है।
बीएमसी का सालाना बजट २१ हजार करोड़ रुपये है, जो कई प्रदेशों के सालाना बजट से ज़्यादा है। अब शिवसेना-बीजेपी की नजर उन सीटों पर है, जहां निर्दलीय या छोटी पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव जीते हैं।
मुंबई समेत ज़्यादातर नगर निकायों में दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने हार की समीक्षा भी शुरू कर दी है। कांग्रेस के नेता माणिक राव ने कहा है कि टिकट वितरण से पार्टी के कुछ नेताओं में असंतोष उपजा और वे बागी हो गए। कांग्रेस को इससे नुकसान हुआ। वहीं, अपनी पार्टी के मिलेजुले प्रदर्शन और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को समर्थन देने की अटकलों पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए राज ठाकरे ने कहा, 'यह हमेशा जरूरी नहीं है कि किसी और पार्टी के साथ जुड़ा जाए। मैं तो चाहूंगा कि हम अकेले रहें।'
शिवसेना के सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने अपनी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन पर कहा, 'लोगों ने उद्धव ठाकरे को वोट दिया है। हमें नहीं लगता है कि शिवसेना को एमएनएस की जरूरत है। हम बीएमसी की सत्ता अपने दम पर भी चला सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला बाला साहब (बाल ठाकरे) का है।' महाराष्ट्र में 10 महानगर पालिकाओं में पांच में शिवसेना और बीजेपी गठबंधन आगे है। जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ४ महानगर पालिकाओं में ही आगे रहा।
बीएमसी का सालाना बजट २१ हजार करोड़ रुपये है, जो कई प्रदेशों के सालाना बजट से ज़्यादा है। अब शिवसेना-बीजेपी की नजर उन सीटों पर है, जहां निर्दलीय या छोटी पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव जीते हैं।
मुंबई समेत ज़्यादातर नगर निकायों में दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने हार की समीक्षा भी शुरू कर दी है। कांग्रेस के नेता माणिक राव ने कहा है कि टिकट वितरण से पार्टी के कुछ नेताओं में असंतोष उपजा और वे बागी हो गए। कांग्रेस को इससे नुकसान हुआ। वहीं, अपनी पार्टी के मिलेजुले प्रदर्शन और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को समर्थन देने की अटकलों पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए राज ठाकरे ने कहा, 'यह हमेशा जरूरी नहीं है कि किसी और पार्टी के साथ जुड़ा जाए। मैं तो चाहूंगा कि हम अकेले रहें।'
शिवसेना के सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने अपनी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन पर कहा, 'लोगों ने उद्धव ठाकरे को वोट दिया है। हमें नहीं लगता है कि शिवसेना को एमएनएस की जरूरत है। हम बीएमसी की सत्ता अपने दम पर भी चला सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला बाला साहब (बाल ठाकरे) का है।' महाराष्ट्र में 10 महानगर पालिकाओं में पांच में शिवसेना और बीजेपी गठबंधन आगे है। जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ४ महानगर पालिकाओं में ही आगे रहा।
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