शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

इंटरनेट पर अपराध के २१८ मामले



फेसबुक का काला सच,
(शैलेष जायसवाल)
   दुनियाभर के दोस्तों को एक साथ लानेवाली सोशल बेबसाईट ’ फेसबुक’ का दूसरा चेहरा समाज के सामने आ गया है। सायबर पुलिस के एक खुलास में साबित हुआ है कि तलाकशुदा और बेवफा दोस्त का बदला लेने के लिए अधिकतर अपराध प्रवृत्ती के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।  फेसबुक  पर चरित्रहनन को लेकर सायबर पुलिस के पास पिछले साल भर में २१० शिकायते दर्ज हई हैं। जिनमें ४ शिकायते  फेसबुक द्वारा दोस्ती कर बलात्कार जैसी घिनौनी हरकत की है। 
इंटरनेट पर बढते अपराधों की शिकायते अब बढ़ती ही जा रही है। सायबर पुलिस के मुताबिक पिछले साल सोशल वेबसाईट पर बदनाम करनेवाले कमेंट्स लिखने के खिलाफ २१८ मामले दर्ज हुए हैं। जिनमें से अकेले पेâसबुक के खिलाफ ही २१० मामले हैँ। जबकि ऑरकुट का एक, लिंक्डइन के तीन और हायफाय के खिलाफ चार मामले हैं। पुलिस के मुताबिक एक समय पहले प्रेम संबंधों में दरार आने के बाद अपने प्रेमी या प्रेमिका से बदला लेने के मकसद से उन्हें बदनाम करने के मामले सबसे ज्यादा है। अगर प्रेमिका का विवाह हो चुका है तो उसके वैवाहिक जीवन में खलल मचाने के लिए उसके साथ खीची गई पुरानी तसवीरों को नेट पर अपलोड कर दिया जाता है। इसके अलावा कॉलेज में सबसे ज्यादा पसंद आनेवाली लड़की का चेहरा फोटोश़ॉप में विकृत या अश्लिल बनाकर पेश किया जाता है। यहां तक कि नेट पर कोई लड़की रिस्पोंस नहीं दे रही है तो उसका फर्जी आईडी बनाकर अश्लिल शब्दकोष अपलोड किए जाने के मामले भी सबसे ज्यादा हो रहे हैं। सिर्फ प्रेमी युगल ही नहीं बल्कि ऑफिस या कॉलेज में भी अपनी सहेली की बदनामी करने के लिए इंटरनेट को हथियार बनाने में खुद लड़किया भी इसमे पीछे नहीं है। सहेली को बदनाम करने के लिए उनका फोन नंबर और अश्लिल फोटों डालने के आरोप में पिछले ही महिने पुलिस ऐसी दो कॉलेज की छात्रा को गिरफ्तार किया हैँ। 
सहायक पुलिस आयुक्त के मुताबिक ऐसे मामले में गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ सूचना अधिनियम की धारा ६६ के तहत तीन साल तक वैâद हो सकती है। इसमें अपराध के लिए उपयोग में लाया हुआ कम्प्युटर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेजा जाता है। जांच में मिली जानकारी और सबूत के आधार पर आरोपी को कड़ी सजा होती है।

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