
मुंबई . जोगेश्वरी पूर्व के वार्ड न. ७० से चुनावी नामांकन भरनेवाले निर्दलीय उम्मीदवार को अपात्र घोषित कर देने की वजह से चुनावी निर्णय अधिकारी पर रिश्वत लेकर गलत तरिके से नामांकन रद्द करने की साजीश का आरोप लगाया गया है। नाराज निर्दलीय उम्मीदवार के मुताबिक नामांकन रद्द करने के लिए अधिकारी को मोटी रकम दी गई है। अगर नामांकन रद्द करने का सही कारण नहीं बताया गया तो समर्थकों के साथ चुनाव आयुक्त कार्यालय पर आमरन अनशन की चेतावनी भी सावंत ने दे डाली है।
वार्ड नं. ७० से निर्दलीय चुनाव के लिए नामांकन भरनेवाले ज्ञानेश्वर सावंत ने २७ जनवरी को पर्चा भरा था। जबकि १ फरवरी को स्क्रूटिनी के दौरान उनका नामांकन मंजूर भी कर लिया गया। सावंत के मुताबिक २ फरवरी की शाम को ही उन्हें फोन पर नामांकन रद्द होने के बारे में सुचित किया गया। वहां मौजूद मुख्य चुनाव अधिकारी संजय सरवदे ने दूसरे दिन शाम ७ बजे अपात्र का प्रमाणपत्र दे दिया। सावंत के मुताबिक अपात्र घोषित करने का सही कारण बताए बगैर ही उन्हें फोन पर केवल सुचित किया गया। जबकि औपचारीक तौर पर नोटीस देने में काफी देरी लगा दी। ताकि इस फैसले पर कोई कानूनी कार्रवाई करने के लिए समय ही न बचे। इस बात से एक सोची समझी गहरी साजीश की बू आ रही है।
उप चुनाव अधिकारी गिरीश बागवे के मुताबिक सावंत ने १९९६ से मनपा का बकाया असेसमेंट टैक्स नहीं चुकाया था। इसलिए उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। मगर सावंत का कहना है कि जिस चाल के मकान का उनपर असेसमेंट टैक्स लगाया गया है, दरअसल वह १९९९ में ही बेचा जा चुका है। उस जमीन का सारा टैक्स भी भरा जा चुका है। जिसके सभी जरूरी दस्तावेज और सबूत उनके पास मौजूद है। मगर उनकी दलीलों और सबूतों को नजर अंदाज कर दिया गया और बेबुनियादी तौर पर नामांकन रद्द कर दिया गया। ज्ञानेश्वर सावंत के सचिव दिपक रेडकर ने बताया कि वार्ड में सावंत की जीत लगभग तय थी, मगर साजीश के चलते उनपर कानूनी उलझने लगा दी गई है। इस बात को लेकर वे मुख्य चुनाव आयुक्त नीला सत्यनारायण से भी मिलने के लिए उनके कार्यालय पर पहुंचे तो उनसे मिलने नहीं दिया गया। रेडकर के मुताबिक अगर न्याय नहीं मिला तो सावंत के समर्थकों ने सड़क पर भी उतरने की तैयारी कर ली है।
हालांकि सीटी सिवील कोर्ट में सावंत ने याचिका दायर की है। मगर चुनाव प्रणाली में किसी भी अदालत को हस्तक्षेप का अधिकार न होने के कारण अब चुनाव के बाद ही अदालत में मामला चलाया जाएगा। जबकि अपात्र घोषित होने का पत्र देरी से मिलने के कारण तीन दिनों के अंदर चुनावी अदालत में अपिल नहीं किया जा सका। सावंत ने आयोग से मांग की है कि उन्हें अपात्र करने का सही कारण बताया जाए या न्याय दिलाया जाए अन्यथा चुनाव आयुक्त कार्यालय के सामने आमरण अनशन करने के लिए बैठ जाएंगे।
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