सोमवार, 23 जनवरी 2012

अमरावती में फिर लहराएगा भगवा

खून में बसी है शिवसेना - दिनेश बुब
(संवाददाता/अमरावती)
हाराष्ट्र के अमरावती शहर महापालिका चुनाव के मद्देनजर यहां अफवाहों का माहौल तेज है। इसी के चलते शिवसेना छोड़ने की अफवाहों पर पूर्णविराम लगाते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अमरावती शहर प्रमुख दिनेश बुब ने कहा कि शिवसेना उनके खून में बसी है। इसलिए मरते दम तक वे शिवसेना से अलग नहीं हो सकते। महायुती को लेकर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि अमरावती महानगर पालिका में फिर से ४३ प्रभाग में से ४२-४४ सीटों से जीत कर यहां फिर से युति का भगवा लहराएगा। 
   विरोधियों द्वारा फैलाई गई गलत अफवाहों को शर्मनाक बताते हुए शिवसेना नगरसेवक दिनेश बुब ने दोपहर का सामना को बताया कि १९८६ में ही शिवसेना में प्रवेश के बाद किसी भी पार्टी में जाने की बात उन्होंने कभी नहीं सोची। महज राजनीति के लिए ही वे शिवसेना में शामिल नहीं हुए थे। इसलिए शिवसेनाप्रमुख बाल ठाकरे ने लंबे समय तक उन्हें शहर प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी। जिसके बाद १९९५ में शहर में शिवसेना की सत्ता आई। सभी ओर महायुति के चलते परिवर्तन का दृष्य दिखाई दे रहा है। इसलिए कांग्रेसी भ्रम में न रहे और यह बात अच्छी तरह जान ले कि इस बार फिर से शिवसेना की लहर चल रही है। शहर में हो रहे ८६ सीटों के चुनाव को लेकर जीत हासिल करने के लिए महायुति ने कमर कस ली है। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रमुख उन्हें आगे कोई भी जिम्मेदारी दे तो वे बखूबी निभाकर अपना निष्ठा कायम रखेंगे। 
दिनेश बुब के काँगे्रस में जाने की बात को लेकर शहर के काँग्रेसी उपमहापौर शेख जब्बार ने दोपहर का सामना को बताया कि दिनेश बुब की छवी बेहद साफ सुथरी और शिवसेना के प्रति निष्ठावान है। वाकई में दिनेश बुब की कार्यशैली काफी सराहनीय है। शहर में कार्यसम्राट के नाम से जाने जानेवाले दिनेश अगर काँग्रेस में शामिल हो जाए तो इसमें पार्टी को बड़ा फायदा होगा। मगर उनकि बाला साहब के प्रति अप्रतिम निष्ठा को देखते हुए हम सिर्फ उन्हें एक अच्छा राजनैतिक मित्र ही बना पाएंगे। 
गौरतलब है कि इस बार शहर में हो रहे चुनाव को लेकर मतदाता भी भ्रमित है। क्योंकि यहा पर एक प्रभाग में दो नगरसेवकों के लिए एक ही समय पर दो बार वोटिंग होगी। मगर सोचनेवाली बात यह है कि एक ही प्रभाग में दो विरोधी दल के नगरसेवक एकसाथ कैसे काम करेंगे।

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