शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

छोटे व्यापारियों की बड़ी समस्या

बाजार से नदारद होते ५० पैसे, १,२,५ रूपए के सिक्के .....
(शैलेष जायसवाल )
दुकानदार ग्राहकों को छुट्टे पैसे वापस करने की बजाय चॉकलेट या टॉफी हाथ में थमा दे तो चौकिएगा नहीं। मुंबई के मार्वेâट से ५० पैसे, एक, दो और पांच रूपए के सिक्के नदारद होते जा रहे है। जिससे खुदरा व्यापार करनेवालों के लिए चिल्लर की बड़ी समस्या निर्माण हो गई है। बाजार में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर चिल्लर कहां गायब होते जा रहे हैं। वहीं जोगेश्वरी और अंधेरी के कुछ व्यापारी मजबूरन प्रति १०० रूपए पर १५ रूपए के कमिशन एवज में भिखारियों से चिल्लर लेकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं।
ज्यादातर खुदरा व्यापार करनेवाले मेडिकल संचालकों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जोगेश्वरी पूर्व के गुफा रोड सोनार चाल में स्थित न्यु मेट्रो मेडिकल के मालिक अरविंद कुमार भाटी के मुताबिक स्थानीय बैंकों से भी जब सिक्के मांगने पर इनकार कर दिया जाता है तो दुकानदार भी ग्राहकों को छुट्टे पैसे देने में असमर्थ हो जाता है। जिससे उन्हें छुट्टे पैसे के एवज में उन्हें चॉकलेट देना पड़ता है। कई बार तो छुट्टे पैसो के लिए ग्राहक दुकानदार से लड़ पड़ते हैं।
रिटेल एण्ड डिसपेंसिंग केमिस्ट एसोसिएशन (आरडीसीए) के महासचिव प्रसाद दनावे के बताया कि इस समस्या को लेकर आरडीसीए ने कई बार रिजर्व बैंक को लिखित पत्र लिखा। मगर वहां से छोटे व्यापारियों के लिए कोई मदद नहीं मिली। आरडीसीए ने मांग की थी कि स्थानीय बैंको द्वारा दुकानदारों को बड़ी मात्रा में सिक्के मुहैय्या कराए जाए। जबकि आरबीआई ने मामले को छोटा बताकर सीरे खारीज कर दिया गया। वहीं आरबीआई की प्रवक्ता अल्पना किलावाला का कहना है कि मुंबई के मार्वेâट में अब भी बहुत सारे सिक्के प्रचलन में है। वे लगातार मुंबई में पर्याप्त संतुलन के लिए व्यापारियों को सिक्के उचित मात्रा में मुहैय्या कराते हैं। मगर इस व्यापारियों की इस समस्या को देखकर अब यह सवाल उठता है कि आखिर मार्वेâट से सिक्के कहां गायब हो गए?
होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन (आहार) के अध्यक्ष चंद्रहास शेट्टी के मुताबिक एक साल पहले तक बैंको द्वारा सिक्के दिए जाते थे। मगर अब सिक्के देना बंद कर देने की वजह से होटल व रेस्टोरेंट चालकों के सामने बड़ी समस्या निर्माण हो गई है। बता दें कि  ३१ मार्च, २०११ को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वहाँ संचलन में ११२.१८४ अरब सिक्के थे। गौरतलब हैं कि जोगेश्वरी के चंगे-भले भिखारी भी भीख मांगकर लाए हुए हजारों के सिक्के बड़ी कमिशन पर दुकानदारों को बेचते हुए ऩजर आते हैं। शिवसेना व्यापार विभाग के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर सावंत ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए दुकानदारों से अपील की है कि भिखारियों को दान में सिक्के न देकर उन्हे खाने-पीने की ची़जे दे। जिससे सिक्कों की कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। साथ उन्होंने कहा कि इस संबध में वे वित्तमंत्री को लिखित पत्र देंगे।

कोई टिप्पणी नहीं: