गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

२०११ में हुआ ३३५ नन्हों का भविष्य खराब


बच्चों से भीख मंगवाते बड़े भिखारी
(शैलेष जायसवाल)
हिंदुस्थान के कानून में भीख मांगना अपराध है। मगर फिर भी इन दिनों स्वप्ननगरी मुंबई की चकाचौंध में सड़क पर भीख मांगनेवाले छोटे बच्चों की बढ़ती तादाद देश के कानून और भविष्य को मुंह चिढ़ाती ऩजर आ रही है। बच्चों के हित में कार्यरत  संस्था बालप्रपुâल्ता से मिले ये आंकड़े बड़े ही चौकानेवाले हैं कि पिछले एक साल में रेलवे पुलिस ने भीख मांगने वाले ३३५ छोटे बच्चों को गिरफ्तार कर चिल्ड्रेन्स होम के हवाले किया। जिससे एक और खुलासा सामने आया है कि मुंबई की लाईफ लाईन कही जानेवाली ट्रेन के अदंर कम उम्र के बच्चे रो-रो कर भीख मांगते नजर आनेवाले बच्चे दरअसल दूसरे राज्यों से चोरी कर के लाए गए हैं।
सुत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंबई शहर में आज भी दौलत के भूखे भेड़िए इन नन्हे बच्चों का शोषण कर इनसे ट्रेन में भीख मंगवाते हैं। इस बात की पुष्टी मुंबई पुलिस एवं कई सामाजिक संस्थाओं ने की हैं। ज्ञात हो कि अंधेरी में कई बार सामाजिक संस्थाओं ने ऐसे मामलों का खुलासा कर अपराधियों को रंगे हाथों पुलिस से पकड़वाया है। बाल प्रपुâल्ता संस्था के संचालक संतोष शिंदे के मुताबिक कई बार तो पुलिस ने भी इस मामले में लापरवाही बरत रही हैं। जिससे नन्हीं जान अपराधियों के शिवंâजे में फसने के ज्यादा मामले हो रहे हैं। वर्ष २०११ में ही ३३५ बच्चों के भविष्य खराब होने का यह आंकड़ा आनेवाले सालों के लिए बहुत ही गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
पिछले दिनों से बाल प्रपुâल्ता संस्था लोकल ट्रेन में गाना गाकर भीख मांगनेवाले बच्चों को पकड़ कर उनके अच्छे भविष्य के लिए उन्हें चिल्ड्रेन्स होम में ले जाने का काम कर रही है। इससे पहले भी संस्था ने कई बाल कामगारों को छुड़ाकर इनसे काम करवानेवालों पर कानूनी कार्रवाई करवाई थी। इन दिनों ऐसे बच्चों को पकड़े जाने के बाद पुलिस ने एक चौकाने वाला खुलासा किया है कि भीड़ में जोर से गाना गाकर या कोई भी करतब दिखाकर जबरन भीख मांगने पर मजबूर करनेवाले अपराधी इन्हें दूसरे राज्यों से चोरी कर के लाते हैं। उन्हें ज्यादा भीख मिले इसलिए उन्हें नशे की चीजे पिलाकर उनकी बुरी हालत बनाई जाती है।
भिखारियों को भीख मांगने से रोकना भी मुंबई पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती है। जब तक इन से भीख मंगवाने वाले बड़े भिखारियों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक नन्हें बच्चों का भविष्य अंधकारमय ही रहेगा। संतोष शिंदे के मुताबिक रेल्वे प्लेटफॉर्म पर इन भिखारियों की सबसे ज्यादा तादाद होने के बावजूद रेल्वे पुलिस ने अबतक किसी बड़े भिखारी पर कार्रवाई नहीं की है। जबकि रेल पुलिस आयुक्त ए.के. शर्मा के मताबिक रेल में गुम हुए बच्चों को कब्जे में लेकर उन्हें आश्रमगृहों में भेजा जाता है। वहीं कोई भिखारी अगर किसी दूसरे के बच्चे को लेकर भीख मांगता हुआ ऩजर आए तो उसे दस हजार रूपए का जुर्माना लगाकर सजा देते हैं।

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