फिर भी वसूला जा रहा है टोल
मुंबई. गोरेगांव पूर्व में स्थित आरे कॉलनी में खराब एवं खतरनाक सड़कों के चलते पिछले तीन सालों में ७४ दुर्घटनाएं और २२ मौतें हो चुकी है। जबकि शेष १४ घायल लोग अब भी अस्पताल में कई महिनों से उपचार ले रहे हैं। स्थानीय नागरिक द्वारा सूचना अधिकार के तहत यह जानकारी सामने आई। अचंभे की बात तो यह है कि मुंबई का अबतक की सबसे खराब एवं विवादित सड़क होने के बावजूद सरकार ने अभी तक यहां पर होनेवाले सड़क हादसों को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है।
उल्लेखनीय है कि ाqशवसेना समेत कई राजनैतिक दलों ने उक्त खराब सड़क के पुननिर्माण को लेकर टोल नाका बंद का आंदोलन किया था। मगर हर बार आरे प्रशासन और सरकार केवल वायदा कर के मुकरती आ रही है। यहां के स्थानीय आदिवासी लोग भी इस खराब सड़क हादसे के शिकार होते जा रहे है। बतला दे कि १९६५ में बनी इस ५२ किलोमिटर की विशाल सड़क पर अब बड़े और खतरनाक गड्ढे ऩजर आने लगे हैं। पिछले ४६ सालों में इसे अभी तक नूतनीकरण नहीं किया गया है। जिसके चलते उबड़-खाबड़ हो चुके इस सड़क पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं में इ़जाफा होता जा रहा है। सोचनेवाली बात तो यह है कि इन खतरनाक सड़कों भी सरकार लोगों से भारी टोल वसूल रही है।
एक विलास वलवी नामक आदिवासी रहिवासी ने जब सूचना अधिकार के तहत सरकार से हादसों की जानकारी मांगी तो चौंका देनेवाला सच सामने आया। मिली जानकारी के मुताबिक २००९ में पूरे सालभर में कुल २२ सड़क हादसों के कारण ६ लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि २०१० में हुए हादसों में ३० दुर्घनाओं के कारण ९ लोगों की मौत हो चुकी है। वही इस वर्ष नवंबर २०११ तक २२ हादसे हो चुके है। जिसमें ७ लोग अपनी जान गवा चुके है। इस पर दुख जताते हुए शिवसेना विधायक रविंद्र वायकर ने बताया कि इस विशाल सड़क पर आरे प्रशासन ने गोरेगांव, पवई तथा मरोल इन तीन जगहों पर टोल नाके लगा रखे है। १९८२ से वसूले जानेवाले इस टोल से सरकार को सालाना ५.१७ करोड़ की कमाई होती है। वायकर के मुताबिक पूरे ५२ किलोमिटर के सड़क निर्माण के लिए कुल ९० करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया था। जिसमें से सरकार ने केवल ७.३० किलोमिटर ़की मुख्य सड़क निर्माण के लिए केवल ३ करोड़ की मंजूरी देकर मई २०११ में केवल डेढ़ करोड़ ही दिए थे। जिससे अबतक कही भी सड़क निर्माण का कार्य आरंभ नहीं किया जा सका। जबकि ७ मीटर चौड़ी इस मुख्य सड़क के निर्माण के लिए २० करोड़ रूपए की अनुमानित राशि मापी गई है। वायकर ने कहा है कि बेशर्म और लाचार सरकार इतने आंदोलनों के बावजूद अगर सड़क निर्माण में कोताही बरतती है तो इसके विरोध में आगामी अधिवेशन में आवाज उठाई जाएगी और अगले माह से बीओटी के आधार पर सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
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