जल्दी पुनर्विकास की मांग को लेकर फिर से अनशन पर लोग
राजीव गांधी आवाज योजना लागू करने पर सरकार ने मंजूरी देने के बाद समाजसेवी मेधा पाटकर ने भले ही अपना अनशन तोड़ दिया हो, मगर अब भी गोलीबार में पुनर्विकास को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ है। पिछले डेढ साल से ट्रंजिट कैम्प में रह रहे लोगों स्थगन के विरोध में तथा जल्दी मकान उपलब्ध कराने की मांग को लेकर उपोषण शुरू कर दिया है। जबकि सोमवार को तकरीबन १५ हजार लोगों ने मेधा पाटकर तथा राजीव गांधी आवास के विरोध में जिला अधिकारी कार्यालय की ओर मोर्चा ले जाकर धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कारियों की मांग थी कि जिन्हें राजीव गांधी आवास योजना चाहिए उन्हे बेशक दिया जाए, मगर जो लोग पिछले दो साल से ट्रांजिट कैम्प तथा बाहर किराए के मकान में रह रहे है उन्हें जल्द से जल्द घर उपलब्ध होने चाहिए। विशाल धरना प्रदर्शन के बाद वहां के अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि कुछ दिनों के भीतर ही बीच का रास्ता जरूर निकालेंगे।
मोर्चे में शामिल श्री गणेशकृपा सोसायटी (नियोजित) की चीफ प्रमोटर शुभांगिनी परशुराम शिंदे ने मीडिया को बताया कि पूरे गोलीबार में तकरीबन ८० प्रतिशत लोग राजीव गांधी आवास योजना के खिलाफ है। फिर भी सरकार जिसे चाहे उसे अलग जगह पर उक्त योजना के अंतर्गत आवास दे सकती है। मगर जो लोग पहले से ही बील्डर के साथ है उनका जल्द से जल्द पुनर्वसन किया जाए।
उपोषण पर बैठे शेख कलीम उद्दीन के मुताबिक मेधा पाटकर के समर्थन में केवल बाहरी लोग उनके साथ बैठे थे। उनके आंदोलन में केवल ५० लोग ही शामिल थे। जबकि हमारे साथ आज भी कुल २५ हजार लोग समर्थन में है और १५ सौ लोग पुनर्विकास की मांग को लेकर उपोषण कर रहे हैं। मतलब साफ है कि बिल्डर से पैसे ऐठने के मनसूबे को लेकर वे लोगों को गुमराह कर रहे है। शिवालिक बिल्डर के सीईओ किरण जाधव के मुताबिक केवल अपात्र लोग ही आंदोलन में शामिल थे। ९७ प्रतिशत सम्मती पत्र मिलने के बाद ही डिमोलिशन का काम शुरू किया गया था। मगर अब सरकार और कानून जो चाहेगा वही किया जाएगा।
राजीव गांधी आवाज योजना लागू करने पर सरकार ने मंजूरी देने के बाद समाजसेवी मेधा पाटकर ने भले ही अपना अनशन तोड़ दिया हो, मगर अब भी गोलीबार में पुनर्विकास को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ है। पिछले डेढ साल से ट्रंजिट कैम्प में रह रहे लोगों स्थगन के विरोध में तथा जल्दी मकान उपलब्ध कराने की मांग को लेकर उपोषण शुरू कर दिया है। जबकि सोमवार को तकरीबन १५ हजार लोगों ने मेधा पाटकर तथा राजीव गांधी आवास के विरोध में जिला अधिकारी कार्यालय की ओर मोर्चा ले जाकर धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कारियों की मांग थी कि जिन्हें राजीव गांधी आवास योजना चाहिए उन्हे बेशक दिया जाए, मगर जो लोग पिछले दो साल से ट्रांजिट कैम्प तथा बाहर किराए के मकान में रह रहे है उन्हें जल्द से जल्द घर उपलब्ध होने चाहिए। विशाल धरना प्रदर्शन के बाद वहां के अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि कुछ दिनों के भीतर ही बीच का रास्ता जरूर निकालेंगे।
मोर्चे में शामिल श्री गणेशकृपा सोसायटी (नियोजित) की चीफ प्रमोटर शुभांगिनी परशुराम शिंदे ने मीडिया को बताया कि पूरे गोलीबार में तकरीबन ८० प्रतिशत लोग राजीव गांधी आवास योजना के खिलाफ है। फिर भी सरकार जिसे चाहे उसे अलग जगह पर उक्त योजना के अंतर्गत आवास दे सकती है। मगर जो लोग पहले से ही बील्डर के साथ है उनका जल्द से जल्द पुनर्वसन किया जाए।
उपोषण पर बैठे शेख कलीम उद्दीन के मुताबिक मेधा पाटकर के समर्थन में केवल बाहरी लोग उनके साथ बैठे थे। उनके आंदोलन में केवल ५० लोग ही शामिल थे। जबकि हमारे साथ आज भी कुल २५ हजार लोग समर्थन में है और १५ सौ लोग पुनर्विकास की मांग को लेकर उपोषण कर रहे हैं। मतलब साफ है कि बिल्डर से पैसे ऐठने के मनसूबे को लेकर वे लोगों को गुमराह कर रहे है। शिवालिक बिल्डर के सीईओ किरण जाधव के मुताबिक केवल अपात्र लोग ही आंदोलन में शामिल थे। ९७ प्रतिशत सम्मती पत्र मिलने के बाद ही डिमोलिशन का काम शुरू किया गया था। मगर अब सरकार और कानून जो चाहेगा वही किया जाएगा।
पिछले दिनों मुंबई के खार ईस्ट में गोलीबार इलाके में स्लम डेवलपमेंट के नाम पर कई घरों पर बुल्डोजर चलाए गए थे। मेधा का आरोप है कि डेवलपमेंट की आड़ में एक बिल्डर लोगों का घर छीन रहा है। मेधा की बिगड़ती हालत को देख सरकार ने कहा है कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी। इसके बाद ही मेधा ने अपना अनशन तोड़ा था ।

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