प्रशासन अब भी कर रहा हैं गंभीर हादसों को नजरअंदाज
आरे कॉलोनी में खराब सड़कों के कारण लगातार हो रहे हादसों को लेकर कल एक बार फिर शिवसेना की ओर से सड़क निर्माण की मांग को लेकर टोल बंद आंदोलन किया गया। इसी मांग को लेकर विविध राजनैतिक दलों द्वारा किया गया यह पांचवा टोल बंद आंदोलन हैं। मगर इसके बावजूद आरे प्रशासन एवं राज्य सरकार आरे कॉलोनी में बढते हादसों के गंभीर मुद्दे को नजर अंदाज करती नजर आ रही हैं।
गौरतलब हैं कि आरे कॉलोनी की सड़के पिछले कई सालों से खराब अवस्था में हैं। यहां पर वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है। इसी के चलते यहां आए दिन खतरनाक वाहन दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा हैं। बता दें कि इसी को लेकर शिवसेना विधायक रवींद्र वायकर के नेतृत्व में महायुती के तीनों दलों ने मिलकर २२ सितंबर २०११ को टोल बंद आंदोलन किया था। तब डेअरी आयुक्त ने तत्काल सड़के सुधारने का आश्वासन दिया था। मगर आज भी अवस्था ज्यों की त्यों ही हैं। वायकर ने लगातार पत्राचार द्वारा प्रशासन से सड़क निर्माण जल्दी शुरू करने की मांग के बावजूद अबतक कोई प्रतिसाद नहीं मिला तो शिवसैनिकों को विशाल मोर्चे के साथ शनिवार को टोल बंद आंदोलन किया। शिवसेना नेता गजानन किर्तिकर एवं वायकर ने डेअरी आयुक्त जगदिश केरूरे तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक र. जाधव को मिडिया के समक्ष निवेदन पत्र सौंपते हुए हाथ जोड़कर निवेदन करते हुए चेतवानी भी दी कि शिवसैनिक अगर हाथ जोड़ सकते हैं तो भ्रष्टाचार के खिलाफ हाथ छोड़ भी सकते हैं। अत: बेहतर होगा कि लोगों को और परेशानी में न डालकर जल्द ही सड़क निर्माण शुरू करे।
आंदोलन के बाद तकरीबन एक घंटे तक आरे दुग्धशाला में संबधित अधिकारियों से इस बात पर बहस हुई। चर्चा में सार्वजनिक बांधकाम विभाग के अभियंता श्री शिंदे एवं पीडब्ल्युडी के अधिकारी भी मौजूद थे। आंदोलनकारियों में मुख्य रूप से गजानन किर्तीकर तथा रवींद्र वायकर ने नेतृत्व संभाला। जबकि इसके अलावा आंदोलन में नगरसेवक जितेंद्र वलवी, बाला नर, मंजिरी परब, महिला विभाग संघटक साधनाताई माने, उपविभाग प्रमुख विश्वनाथ सावंत, रचना सावंत, शालिनीताई सावंत, उत्तरभारतीय मंच के अध्यक्ष वैâलाश पाठक, शाखाप्रमुख अजित भोगले, जनार्दन चव्हाण, अनिल म्हसकर, उमेश कदम, नामदेव झिंगाडे तथा विलास कर्जावकर समेत तमाम शिवसैनिक व पदाधिकारी उपस्थित थे।
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