शनिवार, 31 मार्च 2012

पेशाब नहीं पानी था, मजाक बनी पुलिस की तहकीकात


(शैलेष जायसवाल)
   विलेपार्ले में हुई ८७ वर्षीय एक बुजूर्ग महिला की हत्या को लेकर पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट एवं सबूत झूठे साबित हो रहे हैं। हत्या के वक्त मौका-ए-वारदात पर मिले पेशाब को लेकर पुलिस को लगा कि मामला सुलझ गया। मगर फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुलिस की तहकीकात प्रक्रिया का मजाक उडाते हुए यह खुलासा किया कि घटनास्थल पर मिले पेशाब की सेंपल पेशाब नहीं सिर्फ पानी ही है। 
बता दें कि पिछले दिनों अज्ञात हमलावरों ने विले-पार्ले में रहनेवाली ८७ वर्षीय बुजूर्ग महिला प्रमिला दोधी की गोली मार कर हत्या कर घर से ३.६३ लाख का सामान लूट कर फरार हो गए थे। जिसकी तहकीकात में पुलिस को अब तक सफलता नहीं मिल पा रही है। जबकि अब तक इकठ्ठे किए गए सबूतों और चार्जशीट पर भी सवालिया निशान उठने लगा है। गौरतलब हैं कि महिला की लाश के पास से पुलिस ने सबूत के तौर पर पेशाब को जांच के लिए उठाया था। पुलिस का मानना था कि हत्या के बाद आरोपियों ने लाश के पास पेशाब की थी। 
  सुत्रों के मुताबिक पुलिस ने ऐसे चार संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जिससे उनके पेशाब के सेंपल मैच होने का संभावना उन्हें थी। मगर रिपोर्ट ने तो पासा ही पलट दिया। हत्या के कुछ दिनों बाद जिससे हत्या की गई थी वह पिस्तौल भी घटना स्थल पर मिली, मगर उनपर मिले उंगलियों के निशान भी किसी से मिल नहीं रहे है। मृत के बहू और बेटे लगातार पुलिस से अपराधियों से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मगर पुलिस द्वारा जारी तहकीकात संतोजनक न होने से कई लोग विलेपार्ले पुलिस को नकारात्मक एवं आलसी रवैय्याई करार दे रहे हैं। 
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