मनसे कार्यकर्ताओं के बीच जमकर हुई चमाटबाजी, नगरसेवक को गरीयाया
(संवाददाता / मुंबई) चुनाव खत्म होने के बाद जहां हारने के बाद काँग्रेसी खेमें में एक-दूसरे पर दोषारोपन का माहौल है वहीं एकाध सीट जीत जाने के बाद भी अहंकार के चलते मनसे कार्यकर्ताओं के बीच भद्दी गालियां और हिंसा का माहौल व्याप्त हो गया है। ऐसा ही एक माहौल जोगेश्वरी पूर्व में देखने को मिला। जहा वार्ड नं. ७० से नगरसेवक बनते ही अपने ही वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के ाqशवरात्री के निमंत्रण ठुकराकर कांग्रेसियों के कार्यक्रम में जाने की हिमाकत करनेवाले भालचंद्र को आखिरकार अपने ही कार्यकर्ताओं के नफरत का शिकार होना पड़ा। भरी महफील में ही कार्यकर्ताओं ने नगरसेवक को भद्दी गालियों से नवाजा। यहां तक कि कार्यकर्ताओं ने मारपीट के दौरान एक-दूसरे को चमाट भी जड़ दिए।
नगरसेवक बनते ही मनसे के मनचलों ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। नगरसेवक बनते ही भालचंद्र आंबुरे को कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के लिए निमंत्रण मिलने शुरू हो गए। मामला कुछ इस तरह था कि शिवरात्री के उपलक्ष में मनसे के वरिष्ठ कार्यकर्ता जयराज पाठक ने शिवपूजन का आयोजन रखा था। जिसमे नवनिर्वाचित नगरसेवक को मुख्य अतिथी के रूप में आमंत्रिक किया गया। नगरसेवक महाशय ने उनके पास पूरे दिनभर समय न होने का बहाना बताकर कार्यक्रम आने के लिए असमर्थता जताई। मगर ऐन वक्त पर उसी दिन हरी नगर में काँग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित सत्यनारायण पूजा में रात १०.३० बजे पहूंचते ही मनसे कार्यकर्ताओं का पारा गरम हो गया। धोखेबाज और काँग्रेस का दल्ला करार करते हुए कार्यकर्ताओं ने भालचंद्र पर गालियों की बौछार कर दी। जयराज पाठक ने मौके पर ही भालचंद्र से पार्टी के कार्यक्रम में न आने का कारण पूछा। मगर संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने गालियों की बौछार करते हुए अंबुरे को कह डाला कि ’’भोसड़े में गया तु और तेरा ऑफिस, गद्दार तेरी शिकायत राज से कर तेरी औकात बता देंगे’’
इतना कहते ही शिवपूजन के कार्यक्रम में तांडव होने लगा। आध्यात्मिक माहौैल अब रणसंग्राम की भूमि में तबदिल हो गया। मनसे कार्यकर्ताओं में आपसी मारपीट होने लगी। वहां कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं के बीच कार्यकर्ता इतनी गंदी गालीयां देने लगे कि कई लोगों को शर्मिंदगी महसूस हुई और वहां से पलायन करने में ही अपनी भलाई समझे। माहौल इतना खतरनाक बन गया था कि सभी एक-दूसरे पर चमाट पर चमाट जड़ते जा रहे थे। मुकाबला इस बात को लेकर भी हो रहा था कि कौन किसको ज्यादा चमाट मार पाता है। आखिरकार वहां मौजूद कुछ बुजूर्ग शिवसैनिक एवं कांग्रेसियोंने बीच बचाव कर मामले को शांत कराने की कोशिश की।
बता दें कि तीन दि पहले भी अंधेरी स्थित गुरूदास कामत के कार्यालय में वार्ड नं ६६ से हार चुके प्रत्याशी राजेश हेगड़े ने अपने ही कांग्रेस तालुका प्रमुख पर हार का ठिकरा फोडते हुए उनपर हाथ छोड़ दिया। मामला यह था कि शिवसेना के बागी रघुनाथ कदम को कांग्रेस से भी टिकट न मिल पाने के कारण कदम तीसरी बार इसी वार्ड से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। हेगड़े का आरोप था कि कई कांग्रेसी भी कदम को अंदरूनी मदद कर रहे थे। जिसके वजह से उनकी हार हुई और इसका फायदा भाजपा की नगरसेविका उज्वला मोड़क को हुआ। हेगड़े ने आरोप लगाया है कि मोड़क के कामकाज से स्थानीय नागरिक नाराज होते हुए उनके लिए जीत हासिल करना नामुमकीन था। इसलिए कांग्रेस की हार के लिए भी पार्टी के ही पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जिम्मेदार है।
गौरतलब है कि दस महानगरपालिका के चुनाव खत्म होते ही राज्य में राजनीतिक कारणों से हिंसक घटनाओं में काफी इ़जाफा हो रहा है। बता दें कि चुनाव बाद मुंबई और नागपुर में एक-एक व्यक्ति की हत्या की जा चुकी है। जबकि पुणे में निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा ३० गाड़ियों व २० घरों में तोडफ़ोड़ करने की घटना सामने आई है। हालही में सायन विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के कोषाध्यक्ष वसंत जोटा की हत्या के बाद पुलिस को अबतक हत्यारे का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। वहीं नागपुर में मनसे नेता संजय बारई और उसके साथियों को शनिवार को हुई केशवानंद आकरे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है
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