सोमवार, 12 दिसंबर 2011

विश्व का पहली बार थ्री डी लैपरोस्पिक कैमरा भारत में



मुंबई.अब विश्व का पहला थ्री डी लैपरोस्कोपी कैमरा युनिट मुंबई के बिम्स अस्पताल में लाया गया है।  नए रोबोटीक नियंत्रण तकनिक पर आधारित ’आईस्टाईन विजन’ नामक इस उपकरण से ऑपरेशन में इनसान के शरीर में कम चीरफाड होती है और कम खून बहता है। बहूत आसान मानी गई ’लैपरोस्कोपिक सर्जरी’ नामक इस शस्त्रकिया का अबतक ८५ लोग लाभ उठा चुके हैं।
खार पश्चिम में स्थित बिम्स अस्पताल के चीफ सर्जन डॉ. राकेश सिन्हा इस जापानी तकनिक को खरीदनेवाले विश्व के पहले भारतीय डॉक्टर है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनोकोलोजिकल एंडोस्कोपिस्ट के अध्यक्ष डॉ सिन्हा ने पिछले २० वर्षों से १० हजार से भी अधिक टू डी लैपरोस्कोपी शल्य चिकित्सा कर चुके है। अब तक दो बार गिनिज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवा चुके डॉ सिन्हा के मुताबिक टूडी शल्यचिकित्सा करते समय गहराई समझ में नहीं आती थी और इसमें सुरक्षा भी कम रहती है। जबकि इस नई तकनिक की वजह से दोनों आंखे खुली रखकर काम करने जैसी सुविधा प्राप्त है। साथ ही इस ऑपरेशन के तुरंत बाद ही रोगी चल फिर सकता है और दूसरे दिन काम पर भी जा सकता है।
गौरतलब है कि केईम अस्पलात के बीम डॉ. संजय ओक ने भी इस अस्पताल की नई तकनीक का मुआयना कर अपने अस्पताल में भी इसे लगवाने का फैसला किया है। इस तकनिक की वजह से साफ प्रतिमा और शरीर के जिस अंग पर शल्यचिकित्सा की जा रही है उसे प्रत्यक्ष कैमरा से देखकर चिकित्सा करने का अनुभव मिलता है।
इस तकनिक से ऑपरेशन करवाने वाली विश्व की पहली महिला पूर्वी पंजाबी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि ऑपरेशन के दौरान उसे पेट में सिर्पâ २ छोटे छेद किए गए। जिसका उन्हें कोई दर्द भी नहीं हुआ और कहीं खून भी नहीं निकला। यहां तक की केवल ३० मिनट के ऑपरेशन के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई और दूसरे ही दिन अपने सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग के काम पर वापस लौट आई।

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