नई दिल्ली। क्या महिला आयोग की तरह पुरुष आयोग भी होना चाहिए? ये सवाल उठा है उत्तर प्रदेश के आईपीएस ऑफीसर अमिताभ ठाकुर की एक याचिका के बाद। ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल कर मांग की है कि पुरुष आयोग गठित किया जाए। इस आयोग में पुरुष अपने साथ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न की शिकायत लेकर जाएंगे। ठाकुर की मानें तो ऊंचे पदों पर पहुंचने वाली महिलाएं अपने जानबूझ कर सहकर्मी पुरुषों का उत्पीड़न कर रही हैं।
ये हैं यूपी काडर के वरिष्ठ आईपीएस अफसर डाक्टर अमिताभ ठाकुर। मौजूदा वक्त में आईजी नागरिक सुरक्षा के पद पर तैनात हैं। अफसर होते हुए भी अमिताभ ठाकुर अपनी जनहित याचिकाओं के चलते चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने याचिका दायर कर मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकारें पुरुष आयोग का गठन करें ताकि महिलाओं से परेशान और उत्पीड़ित पुरुषों को इंसाफ मिले। ठाकुर ने याचिका में कहा है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का उत्पीड़न काफी ज्यादा है लेकिन तमाम ऐसे मामले भी सामने आ रही हैं जिसमें बदलते परिवेश में प्रभावशाली हैसियत वाली महिलाएं भी पुरुषों का उत्पीड़न कर रही हैं।
दरअसल अमिताभ ठाकुर खुद एक केस हिस्ट्री हैं। वो अपनी ही एक सीनियर अफसर से पीड़ित हैं, तमाम शिकायतों के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ठाकुर का ये भी मानना है कि पुरुष अधिकारियों को अपने मातहत काम करने वाली महिलाओं से भी झूठे आरोपों का डर बना रहता है।
अमिताभ ठाकुर का कहना है कि मेरे अंडर में भी तमाम महिलाएं काम करती हैं, जिससे असुरक्षा की भावना बनी रहती है। मेरे इस कदम के बाद लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं। फेसबुक और ट्वीटर पर लोग मुझसे जुड़ रहे हैं। जिस तरह से महिला और एससीएसटी आयोग है वैसे ही पुरुष आयोग भी होना चाहिए। ताकि महिलाओं द्वारा उत्पीड़ित पुरुषों को संवेदनशीलता के साथ आयो सुनवाई करे।
फेसबुक और ट्वीटर पर ही नहीं अमिताभ ठाकुर को घर में भी समर्थन मिल रहा है। उनकी पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर जो तकरीबन हर संवेदनशील मुद्दे पर जनहित याचिका और आरटीआई दाखिल करती रहती हैं। इस मामले में नूतन ठाकुर भी अपने पति के साथ खड़ी हैं और इस आयोग के गठन को जरूरी बता रही हैं।
फिलहाल ये एक बहस का विषय है कि क्या पुरुष इस हालत में है कि उसका कोई उत्पीड़न कर सके। हाल ही में मुंबई में एक व्यक्ति को इसी आधार पर तलाक मिल गया कि वो अपनी पत्नी से पीड़ित था। उसकी शिकायत थी कि पत्नी उससे अत्यधिक यौन संसर्ग की अपेक्षा करती थी। अदालत ने इस मामले को उत्पीड़न की तरह देखते हुए तलाक दे दिया।
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