पिछले साल की चर्चित फिल्म लव, सेक्स और धोखा यानी एलएसडी की सफलता ने एकता कपूर को प्रेरणा दी कि दिल्ली की एक लड़की के एमएमएस कांड पर भी बॉक्स ऑफिस पर आसानी से बिकने वाली फिल्म बन सकती है!! एलएसडी भी एकता कपूर के बैनर की ही फिल्म थी, जिसे प्रतिभाशाली निर्देशक दिबाकर बनर्जी ने निर्देशित किया था। लेकिन रागिनी एमएमएस फिल्म के लिए एकता सिर्फ एमएमएस कांड के कथानक पर ही निर्भर नहीं रहीं। उन्होंने पारलौकिक घटना से जोड़कर फिल्म की कहानी को एक नई शक्ल दे दी।
उन्हें यह आइडिया क्लिक कर गया कि अगर सेक्स के साथ हॉरर को भी परोसा जाए, तो सफलता की उम्मीद दुगुनी लगाई जा सकती है। सो, फिल्म रागिनी एमएमएस के भुतहा कथानक में सेक्स का तड़का कुछ इस अंदाज में लगाया गया है कि दर्शकों का एक वर्ग तो आसानी से खिंचा ही चला आए। वाकई पवन कृपलानी के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने उद्देश्य में सफल होती दिख रही है।
फिल्म में कई खामियां हैं, परंतु नयापन भी है। हॉलीवुड की फिल्म पैरानॉर्मल एक्टिविटी से प्रेरित होने के बावजूद यह बॉलीवुड के दर्शकों के लिए एक नई चीज है। निश्चित रूप से यह फिल्म जितना डराती है, उतना ही उत्तेजित भी करती है। एमएमएस बनाने के उद्देश्य से एक वीरान हवेली में रागिनी को लेकर आया उदय प्रेतात्मा के कोप का शिकार हो जाता है।
यह वह हवेली है, जिसमें एक मराठी युवती को चुड़ैल करार देकर उसके घरवालों ने मार दिया था। फिल्म की कहानी दो लाइन की ही है, लेकिन इसका ट्रीटमेंट उल्लेखनीय है। डर पैदा करने के लिए फिल्म में जिस शिल्प का सहारा लिया गया है, वह यथार्थपरक है। ऐसा लगता ही नहीं कि कोई फिल्म देखी जा रही है। महसूस होता है कि सारी घटनाएं सचमुच आपके सामने घटित हो रही हैं। ज्यादातर रात के दृश्य हैं, जो भय पैदा करने में पूरी तरह योगदान देते हैं।
बॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की लिस्ट में अपना नाम लिखाने की कूवत रखने के बावजूद इस फिल्म की एक सीमा भी है। कई दृश्य बेवजह लंबे खींचे गए हैं। डेढ़ घंटे की अवधि होने के बाद भी इसकी एडिटिंग की जा सकती थी। सही एडिटिंग न होने के कारण दूसरे हिस्से में यह फिल्म कमजोर पड़ जाती है। लेकिन फिल्म के कलाकारों का अभिनय सशक्त है। कैनाज मोतीवाला और राजकुमार यादव ने सजीव और सटीक अभिनय किया है।
उन्हें यह आइडिया क्लिक कर गया कि अगर सेक्स के साथ हॉरर को भी परोसा जाए, तो सफलता की उम्मीद दुगुनी लगाई जा सकती है। सो, फिल्म रागिनी एमएमएस के भुतहा कथानक में सेक्स का तड़का कुछ इस अंदाज में लगाया गया है कि दर्शकों का एक वर्ग तो आसानी से खिंचा ही चला आए। वाकई पवन कृपलानी के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने उद्देश्य में सफल होती दिख रही है।
फिल्म में कई खामियां हैं, परंतु नयापन भी है। हॉलीवुड की फिल्म पैरानॉर्मल एक्टिविटी से प्रेरित होने के बावजूद यह बॉलीवुड के दर्शकों के लिए एक नई चीज है। निश्चित रूप से यह फिल्म जितना डराती है, उतना ही उत्तेजित भी करती है। एमएमएस बनाने के उद्देश्य से एक वीरान हवेली में रागिनी को लेकर आया उदय प्रेतात्मा के कोप का शिकार हो जाता है।
यह वह हवेली है, जिसमें एक मराठी युवती को चुड़ैल करार देकर उसके घरवालों ने मार दिया था। फिल्म की कहानी दो लाइन की ही है, लेकिन इसका ट्रीटमेंट उल्लेखनीय है। डर पैदा करने के लिए फिल्म में जिस शिल्प का सहारा लिया गया है, वह यथार्थपरक है। ऐसा लगता ही नहीं कि कोई फिल्म देखी जा रही है। महसूस होता है कि सारी घटनाएं सचमुच आपके सामने घटित हो रही हैं। ज्यादातर रात के दृश्य हैं, जो भय पैदा करने में पूरी तरह योगदान देते हैं।
बॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की लिस्ट में अपना नाम लिखाने की कूवत रखने के बावजूद इस फिल्म की एक सीमा भी है। कई दृश्य बेवजह लंबे खींचे गए हैं। डेढ़ घंटे की अवधि होने के बाद भी इसकी एडिटिंग की जा सकती थी। सही एडिटिंग न होने के कारण दूसरे हिस्से में यह फिल्म कमजोर पड़ जाती है। लेकिन फिल्म के कलाकारों का अभिनय सशक्त है। कैनाज मोतीवाला और राजकुमार यादव ने सजीव और सटीक अभिनय किया है।
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